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Support for ASIFA poem by Author Pawan

कविता – आज मैने सभ्य समाज में असभ्यता देखी है। फिर एक बेटी को रौंदा कुछ बेहशी दरिंदो ने क्या गलती की थी? उन नन्हें परिंदों ने धर्म की आड़ में फिर कुछ मुजरिम छूट रहे है आज फिर एक बच्ची की माँ के आँशु फुट रहे है आज भगवान के घर में भी मैने वीभत्सता देखी है सभ्य समाज मे मैने आज असभ्यता देखी है  अभी कुछ मत बोलो क्योंकि राजा सो रहे है चुनाव के लिए फिर कुछ दंगे बो रहे है इस लोकतंत्र मै कौन उस माँ को न्याय दिलाएगा कौन उस बाप को अब अब्बू कह कर बुलायेगा यह दाग नही है सिर्फ मुसलमान पर  यह तो घाव है पूरे हिंदुस्तान पर आज मैने रोते बिलखते मानवता देखी है  सभ्य समाज मे मैने आज असभ्यता देखी है  लेकिन फिर कुछ लोग इसे सम्प्रदायिकता में तोलएंगे फिर कुछ लोग बिकाऊ मीडिया की भाषा बोलएंगे आज फिर मैने पनपनती अराजकता देखी है  सभ्य समाज मे मैने आज असभ्यता देखी है  छोड़ ये मर्यादा रूप और काली का अवतार कर ऐसे दानवो का तू देवी नरसंहार कर  दिखा दे कि स्त्री कमजोर नही है इस असभ्य समाज के लिए औरत भी हथियार उठा सकती है अपने स्वभिमान के लिए  आज...

कविता - सच कह रहा हु मै शायर नही हु बस लोग कहते है

कविता – सच कह रहा हु मै शायर नही हु बस लोग कहते है। जिसे चाहता हु अपने ख्यालो में वो ख्वाइस हो तुम जिसे तराशा था अपने सपनो में उन सपनों की नुमाइश हो तुम पता नही इश्क़ में  लोग क्या क्या सहते है सच कह रहा हु मै शायर नही हु बस लोग कहते है....2 इश्क़ के दरिये में गोते जाने कितने लगाते है नीलकंठ सा जहर जाने कितने पाते है। आज कल वो आशिक़ मोहब्बत में रहते है सच कह रहा हु मै शायर नही हु बस लोग कहते है...3 आज कल प्रेम में मीरा की भक्ति कँहा कृष्ण को प्रेमवश में करने वाली  वो राधा में शक्ति कँहा प्रेम के आगे तो भगवान भी ढहते है सच कह रहा हु मै शायर नही हु बस लोग कहते है। Copyright © By Wrote by Author Pawan Singh Sikarwar

कविता - हाँ मै हवा हुँ write by Author Pawan Sikarwar

कविता –  हाँ मै हवा हु मै चंचल हु मै स्थिर भी हुँ मै दयावान के साथ  मै निष्ठुर भी हु हल्का हु मै  भारी भी हु इस कायनात की सारी कहानी भी हु क्योंकि हाँ मै हवा हूँ । मेरा रूप विकट विशाल है मेरे रूप में अनेको मनुष्यो का जाल है। मेरा ही अंश था भीम - महान और लंका को जलाने वाला मेरा वीर पुत्र हनुमान तेरे जीवन का सार मै हु तेरी सांसो का मायाजाल मै हु  क्योंकि हाँ मै हवा हु पवन मै हु  समीर मै हु नदी किनारे दोहे गावत कबीर मै हु युद्ध मे लड़ने वाला वो वीर मै हु प्रेमी को प्रेमिका से बाँधने वाला वो प्रेम तीर में हु हाँ मै हवा हु तेरी बढ़ती सोच मै हु हिमालय पर लगी खरोंच मै हु गीता का ज्ञान मै हु नवजात शिशु सा अज्ञान मै हु माँ की ममता का आँचल मै हु गंगा के पवित्र जल सा  निश्छल मै हु हाँ मै हवा हु  पूर्व मै हु पश्चिम मै हु उत्तर मै हु दक्षिण मै हु अशोक का बढ़ता सम्मान मै हु उस चाणक्य नीति का अभिमान मै हु वीर महाराणा का चेतक मै हु कृष्ण के चरणों की मस्तक मै हु संसार में दहाड़ता सिन्ध मै हु विश्वगुरु बनता हिन्द मै हु  ...

कविता - वाह जनाब क्या शायरी थी wrote by Author Pawan Sikarwar

कविता – वाह जनाब क्या शायरी थी ।  लेखक - पवन सिंह सिकरवार ये इश्क़ नही था उसका ये तो उसकी अख़्तियारी थी कागज पर लिखे मैने उल्टे सीधे शब्द लोगो ने कहा वाह जनाब क्या शायरी थी .....२ मोहब्बत का पर्दा अब बेपर्दा हो गया बिन आग के लगी वो चिंगारी थी अब कैसे करूँ बयाँ अपना दर्द मोहब्बत सी लगने वाली ये कोई उम्रदराज बीमारी थी कागज पर लिखे मैने उल्टे सीधे शब्द लोगो ने कहा वाह जनाब  क्या शायरी थी....३ कृष्ण रंग की मृग थी वो या वो राधा नाम सी प्यारी थी शायरी सी सच्ची थी वो और कविताओं सी संस्कारी थी कागज पर लिखे मैने उल्टे सीधे शब्द लोगो ने कहा वाह जनाब क्या शायरी थी.....४ Write By © Author Pawan Singh Sikarwar

कविता - देखो तुमने अपने हुस्न से क्या क्या पा लिया

कविता – देखो तुमने अपने हुस्न से क्या क्या पा लिया । इश्क़ का मुकद्दर इतिहास लिख गया वफ़ा में बेबफाई करने का हुनर सिख गया आशिको ने समझाया मत कर इश्क़ लेकिन कर उनको नजरअंदाज  उस बाजार में , मै भी बिक गया । तुम्हारे लिए देखो  मेने भी आग के दरिये में खुद को जला लिया देखो तुमने अपने हुस्न से आज क्या क्या पा लिया । जो अपनी माँ तक कि नही सुनता था वो तुम्हे घण्टों सुनने लगा ... दर्द – ए - इश्क़ के आलम में खुद ही घुटने लगा.... लोगो से कहता फिरता था ये ही है सच्ची मोहब्बत ओर आज उसी मोहब्बत में दर्द ढूंढने लगा.... जो गलती करने पर भी माफ़ी नही मांगता था वो तुमसे बिन गलती माफ़ी भी मांगने लगा ... और लगा कुछ गलत हो रहा है, तो इस दिल ने मेरे दिमाग को भी समझा लिया  देखो तुमने अपने हुस्न से आज क्या क्या पा लिया । मोहब्बत और मौत, हे दोनों एक जैसी ही दोनों ही तुम्हे तुम्हारे अपनो से दूर कर देती है। ये हुस्न की परिया तुम्हे इश्क़ में मगरूर कर देती है। में तो कहता हूं करो इश्क़, पर सच्चा नही वादे भी करो , पर पक्का नही माँ, पापा हो या कोई ओर जिसने भी मना किया सभी को ...

कविता - अगर बात निकली है तो बोहोत दूर तक जाएगी wrote by Author Pawan Singh

कविता – अगर बात निकली है तो बोहोत दूर तक जाएगी। राजनीति के गलियारों से राजनीति भाग गई इतिहास के पन्नो में क्रांति जाग गई योजनाए तो बोहोत सुनी लेकिन पकोड़ा योजना जैसी नही जैसा रोजगार हमे चाहिये था  ये तो वैसी नही लोकतंत्र वाली ये  नूर मुझे बड़ी भाएगी अगर बात निकली है तो बोहोत दूर तक जाएगी मेरे देश मे अंधभक्तिवाद की लहर चल रही है चार दिवारी में न्याय देने वाली आंख मीच कर सो रही है । अब पकोड़ा योजना आई है  उम्मीद की लहर बनकर  डॉक्टर इंजीनियर डिग्री वाला पकोड़ा बेच रहा है प्रधानमंत्री पकोड़ा योजना से जुड़कर। इस सरकार में सच बोलने वाले कि सामत आएगी अगर बात निकली है तो बोहोत दूर तक जाएगी ऐसी सरकार से तो हम अब आशिक़ी कर बैठे रोजगार की उम्मीद छोड़ एक सवाल कर बैठे क्या इस योजना मे भी  उन लोगो को आरक्षण मिलएगा जिंदगी की इस दौर में क्या ? जनरल यंहा भी रोएगा राजनीति इतिहास में यह योजना हमे फिर भी रुलायेगी अगर बात निकली है तो बोहोत दूर तक जाएगी बेरोजगारी को क्या बेहतरीन छुपाया है पकोड़े बेचने को भी कला बताया है यह सरकार की राजनीति नही यह तो एक छुरी थ...

Book - scripts EVOL - love teda hai writer by Pawan singh

Script on EVOL – love teda hai दरवाजा खुलता है ... मनीश अपने सोफे पर बैठ कर TV पर क्रिकेट का मैच देख रहा था तभी दरवाजे से उसका दोस्त अंदर आता है । तू यंहा मैच देख रहा है ? तो क्या करूँ तेरे ऊपर नाचूँ साले मेरा मतलब है कि तेरा सोनिया का क्या ड्रामा है रोज का ? बात क्यो नही कर रहा है तू उससे? ड्रामा साले ड्रामे से याद आया कि तेरी वाली केसी है ? Sixer ..... crowd noise बात मत पलट तू पहले बता क्या सीन है? सीन तो सुन ....  भाई तुझे पता लड़कियों का लड़की होना ही एक बहुत बड़ा सीन है इनके दिमाग की तू क्या भगवान भी नही समझ सकते ...तभी तो कहते है कि इन्हें तो भगवान भी नही समझ सकता इन लड़कियों को भगवान ने धरती पर भी इसलिए भेजा है कि वो चाहते है कि तुम अगर समझ जाओ तो मुझे भी बता देना। Sixer .....crowd noise लड़कियों को अगर सॉरी बोलो तो कहएगी की सॉरी मत बोलो न बेबी हम दोनों तो gf bf है सॉरी अच्छा नही लगता है लेकिन अगले दिन ही तुमने कोई भूल करदी तो बस चिल्ला कर कहएगी की तूने तो अभी तक सॉरी भी नही बोला मुझे i hate you Sixer ...noise crowd लड़का बेचारा पूरे हफ्ते पैसे इक्कठे करता...

कविता - ये तो मेरी पुरानी आदत है wrote by Author Pawan Singh

कविता – ये तो मेरी पुरानी आदत है। बात बात पर उससे रुठ जाना उसके मनाने पर भी नही मानना उसकी आँखों में देख कर कहना की में तुझे कभी नही छोड़ कर जाऊंगा लेकिन काम आने पर  उसको छोड़ भाग जाना । पता नही ये कौनसी शहादत है लेकिन ये तो मेरी पुरानी आदत है उसकी झुलफो के साथ खेलना और उसे बात बात पर चिढ़ाना प्यार की बाते करते करते एक दम से हँसना उसको रुला कर फिर हँसा देना उसकी आँखों मे ज्यादा देर तक देखते रहना और मेरी इस हरकत से उसका शर्माना पता नही ये कौनसी रुआदत है लेकिन ये तो मेरी पुरानी आदत है लेट आकर उससे माफी मांगना फ़ोन पर रात भर उसको जगाना फ़ोन रखने वाली हो तो कहना दो मिनट ओर फिर उस दो मिनट में उसे आई लव यू कहलवाना पता नही ये कौनसी इबादत है लेकिन ये तो मेरी पुरानी आदत है। Wrote by © Author Pawan Singh

कविता - कोरे पन्ने write by Garima Jahangirpuri

कविता - कोरे पन्नें............. कोरे पन्नों पर अपने भाव उकेर देते है किसी से न कहे थे जो वो शब्द इन पन्नों में बांध गए है, महज पन्नें नहीं हैं ये सदियों पुरानी कहानी कह देते हैं इसलिए तो.... कोरे पन्नों पर अपने भाव उकेर देते हैं। महज़ किताबों के पन्नें ही नहीं ज़िंदगी के पन्नें भी रोज़ पलटते हैं, रोज़ कुछ नए, अनजाने चेहरे मिलते हैं न वो याद रखते हैं, न हम उन्हें याद करते हैं मिलकर आगे चल देते हैं, और ज़िन्दगी के.... कोरे पन्नों पर अपने भाव उकेर देते हैं। जाने अनजाने चेहरे आस-पास रहते हैं हँसी-ठाके उन्हीं के साथ करते हैं, फिर क्यों? उस भीड़ में भी हम अकेले रहते हैं, और आखिर में.... कोरे पन्नों पर अपने भाव उकेर देते हैं। कुछ अनजान सहारे अपना हाल बता देते हैं पल भर के लिए वे अपने रहते हैं फिर जाने किस ओर रुख मूड लेते हैं, भूल से याद आने पर इन पन्नों पर ही वापस मिलते हैं, तभी तो हम.... कोरे पन्नों पर अपने भाव उकेर देते हैं।

कविता - भारती हु -- Author Pawan Singh

कविता – भारती हु.....। में खुशियां मना रहा हु ,   बेरोजगारी का गरीबी का  भुखमरी का  समाज के साथ हो रहे भेदभावों का, में इन सब खुशियों का पार्थी हु में क्या बोलू जनाब  में तो भारती हु। बुराइया हमारी है लेकिन सरकार इसको मिटाये ...2 कानून, लोकतंत्र , सँविधान द्वारा थोडा चमत्कार करके दिखाए में भारत का नागरिक हु ओर में ही इस अधर्म का सारथी हु में क्या बोलू जनाब में तो भारती हु लेकिन समाज अब एक हो रहा है । हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई अब भाई- भाई हो रहा है..2 इन कृतियों का सिर काटने वाला में ही दुराती  हु में क्या बोलू जनाब में तो भारती हु © Author Pawan Singh Sikarwar Happy republic day all of you  Love always make good society  good society always make good government Good Government always make good country