पांडरी गाँव… शांति का स्थान,
पर उसके पीछे छिपा था एक ऐसा अंधकार
जिसे देखकर अनुभवी तांत्रिक भी काँप उठते थे।
गाँव की नदी में रहता था –
भूरा मशान
एक ऐसा जिन्न, जिसके बारे में कहा जाता—
“उसके सामने मृत्यु भी छोटी लगती है।”
दिन के उजाले में भी वह नदी में अपनी पकड़ से
लोगों को नीचे खींच लेता था।
अब तक दर्जनों मौतें हो चुकी थीं।
गाँव रात को रोशनी जलाकर सोता,
और नदी के पास कोई जाना तो दूर,
उस दिशा में देखता भी नहीं था।
एक दिन धूल के गुबार के बीच एक आकृति दिखाई दी—
लंबा शरीर, त्रिपुंड लिए, चमकती आँखें,
चारों ओर दिव्य आभा…
गाँव वालों को समझ ही नहीं आया कि यह संत है या कोई देवता।
वह थे—
एक ऐसा देव, जिन्हें संसार ने साधु समझा,
पर वह साधु नहीं… शक्ति का भंडार थे।
बाबा ने चुपचाप नदी की ओर देखा—
एक पल में हवा भारी हो गई…
जैसे अंधकार स्वयं घुटनों पर आ गया हो।
बाबा ने मुस्कुराकर कहा—
“भूरा… मैं जानता हूँ तू जाग रहा है।
आज तेरे अंधकार का अंत है।”
गाँव वाले काँप उठे—
कई घरों की खिड़कियाँ अपने आप बंद हो गईं।
बाबा ने उसी स्थान पर
हनुमान जी की स्थापना शुरू कर दी।
मंत्रोच्चार ऐसा कि हवा काँपने लगी।
दीवारें हिलने लगीं।
नदी उफान मारने लगी—
भूरा मशान क्रोधित था।
जब बाबा ने प्राण प्रतिष्ठा की अंतिम आहुति दी,
तो आकाश में दहाड़ गूँजी—
जैसे हनुमान स्वयं उतर आए हों।
बाबा वापस जा रहे थे,
तभी नदी गरजी—
और भूरा मशान ने आक्रमण किया।
पानी आकाश तक उठ गया,
बिजलियाँ कड़कीं,
और बाबा का शरीर नदी में समा गया।
गाँव वाले रो पड़े—
पर उन्होंने जो देखा, उसने उन्हें स्तब्ध कर दिया।
नदी की गहराई में
एक दिव्य प्रकाश उठा…
जिसने सीधे भूरा मशान को जकड़ लिया।
भूरा चीखा—
“देव! तू साधु नहीं… तू मृत्यु का स्वामी है!”
और पहली बार,
इतना शक्तिशाली जिन्न
किसी के सामने घुटनों के बल गिर गया।
अगले दिन नदी के किनारे
परम सिंह संत को सपना आया।
सपने में वही दिव्य प्रकाश…
और बाबा प्रकट हुए—
“मेरा शरीर तो नदी ने ले लिया,
पर मैं शरीर नहीं, शक्ति हूँ।
मेरी समधि यही बनाओ।”
परम सिंह उठे—
उनके माथे पर बाबा का स्पर्श था,
उन्हें महसूस हुआ कि कोई उनकी नाड़ी स्वयं पकड़ रहा है।
समाधि बनते ही
अचानक हवा शांत हो गई…
नदी का प्रवाह सामान्य…
और मंदिर की घंटी अपने आप बज उठी।
फिर आकाश से स्वर—
“तुझे पुत्ररत्न का वरदान है।”
एक साल में संतान का जन्म हुआ।
गाँव में खुशी की लहर दौड़ गई।
बाबा का धाम बनते ही
अलौकिक घटनाएँ शुरू—
▪ मृत जानवर जीवित होने लगे
▪ जो लोग चल नहीं पाते थे, वो चलने लगे
▪ अंधे को रोशनी
▪ और रोगी को उपचार बिना दवा के
लोग कहते—
“पांडरी वाले बाबा यहाँ नहीं हैं,
यहीं हैं।
इस धाम में हर साँस उनके आदेश से चलती है।”
लेकिन भूरा मशान अभी भी भटक रहा था।
वह अब बुरा नहीं था,
पर उसकी ऊर्जा इतनी शक्तिशाली थी कि
धरती थरथरा जाती।
तभी बाबा ने
मौनी बाबा को सपने में आदेश दिया—
“मेरे दूसरे प्रहरी को स्थिर करना है।
तेरी समाधि भी मेरे पास बनेगी।”
समाधि बनते ही
भूरा मशान की असीम ऊर्जा
एक ठहराव, एक शांत रूप में बदल गई—
अब वह बाबा का रक्षक था।
गाँव वाले कहते—
पांडरी वाले बाबा कोई साधारण मनुष्य नहीं थे।
कुछ कहते— हनुमान जी का अंश
कुछ कहते— शिव का दूत
कुछ कहते— मृत्यु पर अधिकार रखने वाला देव
पर सच केवल एक—
वो वो देव हैं जिनके पास वो शक्ति थी
जो मृत में प्राण डाल दे
और प्राणवान को अमर कर दे।**
उनका नाम आज तक कोई नहीं जान पाया।
वे नाम नहीं—एक जीवित शक्ति हैं।

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