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प्रगति के पथपर wrote by junaid bohra

प्रगति के पथ पर इंसान कब रुका है? पर न जाने क्यों इस दौड़ में जीना ही भूल चुका है जिस लट्टू को सारा दिन घुमाते न थकते थे आंगन में, जिस मिट्टी में सारा दिन कभी कबड्डी खेली है, वह लट्टू हो गया लुप्त आ गए फिजित स्पिनर हाथों में, मिट्टी में कबड्डी की जगह मोबाइल  की पब्जी ने ले ली है जिस चबूतरे पर बैठकर देर तक बातें किया करते थे, घंटों जहां दोस्तों के साथ कभी टाइम पास किया है, अब वहां महफिले नहीं सजती , सजता है तो सन्नाटा, व्हाट्सएप में ग्रुप वीडियो कॉल का फीचर जो दिया है याद शक्ति कम हो गई धीरे-धीरे इंसानों की, फोन में जो सारी यादों को संजो कर रखा है, प्रगति के पथ पर इंसान कब रुका है? पर ना जाने क्यों इस दौड़ में जीना ही भूल चुका है. लेखक - जुनैद वोहरा निवास - गुजरात 

वो लड़की - wrote by Author Pawan Singh

वो लड़की जो मेरी परिभाषा में नही बंधी ख्यालात पंछियों की तरह है उसके हसीन नही है वो श्यामली रंग की हसीना देखी है क्या कभी वो लड़की..... वो लड़की जो अनमोल अंगूठी है या उसमे लगा नगीना कोई छोटे बाल, प्यारी मुस्कान और मृगनयनी सी हसीना कोई वो लड़की जो समझने लगी है मुझे मुझसे ज्यादा आजकल क्या देखी है किसी ने ऐसी हसीना कोई वो लड़की....... वो लड़की जो मेरी हर बात को बड़ी ध्यान से सुनती है जो सब मे अच्छाई ढूंढती है जिसे नाचना घूमना अलग संस्कृति में जुड़ना पसंद है वो लड़की जिसे हर बात पर अरे बाबा कहना पसंद है तो लगता है जैसे मेरा दिल धड़कने लगा हो मानो जैसे चाँद भी आसमान में सरकने लगा हो क्या देखी है किसी ने ऐसी लड़की कोई वो लड़की Wrote by Author Pawan Singh Sikarwar

Adventure of Karun Nayar | offical Book teaser | Author Pawan Singh

कविता - बस उस परिंदे को देखना अच्छा लगता है wrote by Pawan Singh Sikarwar

कविता  -   बस उस परिंदे को देखना अच्छा लगता है Wrote By Pawan Singh Sikarwar Copyright by Sikho Foundation आज कल अकेला रहना अच्छा लगता है।  ना किसी से कोई शिकायत और ना ही किसी से उम्मीद  बस अपने आप में मग्न रहना अच्छा लगता है लगता है मानो कोई परिंदा आजाद हो गया हो बस उस परिंदे को देखना अच्छा लगता है एक तरफा ही सही प्यार अभी भी हे उससे अब उसके प्यार की प्यारी यादो में खोना अच्छा लगता है  लगता है मानो वह समुन्दर की लहरों सी हो जिसे छू कर भाग जाना अच्छा लगता है आज कल बस लेटे रहना अच्छा लगता है शाम की चाय की चुस्की लेना अच्छा लगता है शायरी किताबो और कविताओं से दोस्ती भी कर ली है क्योकि अब हँस कर अपना दुःख लोगो को बताना अच्छा लगता है  लगता है मानो जिंदगी हँस रही हो मुझपर  लेकिन अब इस दुनिया में पागल कहलाना अच्छा लगता है लगता है मानो कोई परिंदा आजाद हो गया हो बस उस परिंदे को देखना अच्छा लगता है My new Book Coming Soon - NIGHTMARE DREAM OR TRUTH

सोचो अगर इस कायनात में wrote by Pawan Singh

सोचो अगर इस कायनात में रात ना होती पैसा कमाते फिर तुम सब पर वो बात ना होती अरे मशीन बन जाता वो आदम भी और इंसानियत की भी फिर शुरुआत ना होती सोचो अगर इस कायनात में रात ना होती.......2 सोचो अगर इस कायनात में औरत ना होती फिर उस आदम की भी कोई मूरत ना होती औरत है तो तुम हो वरना भगवान की भी इस ज़मी पर कोई सूरत ना होती सोचो अगर इस कायनात में औरत ना होती........2 सोचो अगर इस कायनात में प्यार न होता कोई भी फिर किसी का यार ना होता अरे नफरतों की आंधी में  फिर जीते वो जिंदगी खुदा को भी मानने को फिर कोई तैयार ना होता सोच अगर इस कायनात में प्यार ना होता....2 सोचो अगर इस कायनात में भगवान ना होता धर्म मे बंटता किसीका ईमान ना होता लेकिन कैसे जीते तुम बिना किसी उम्मीद के बिन खुदा के तो इस कायनात में ये आदम-ए-इंसान ना होता सोचो अगर इस कायनात में भगवान में ना होता Copyright © By Author Pawan Singh

Kalki logo here - download for your T- shirts and Mug etc.

This Tuesday hold your heart beat becoz Kalki meet you in webtoon comic world Just wait for it Kalki a half blood prince  and  today I Publish my kalki series logo here Download this logo for your T- shirt , Mug, etc.

Author interview by wingbizz

www.wingbizz.com/pawansingh.html#.Wv2hxt0NKMF.whatsapp Interview with Pawan Singh Sikarwar | Online Author Interview | Interview by Experts http://www.wingbizz.com/pawansingh.html#.Wv2hxt0NKMF.whatsapp

कविता - स्याही wrote by Author Pawan Singh

कविता – आज कल वो स्याही किसी दुकान में नही मिलती। - ऑथर पवन सिंह - जिसने सीता राम का नाम लिखा रावण का स्वभिमान लिखा लिखी जिसने कृष्ण लीला कर्ण का बलिदान लिखा जिसने वेदो का ज्ञान लिखा आध्यत्म और विज्ञान लिखा लिखा जिसने कृष्ण की उदारता उसने अर्जुन का बाण लिखा अब उस सत्यवादी हरिश्चंद्र की सच्चाई नही मिलती आज कल वो स्याही किसी दुकान में नही मिलती जिसने गांधी का स्वदेश लिखा गीता का उपदेश लिखा लिखा राधा का प्रेम जिसने उसने महादेव महेश लिखा जिसने अल्लाह और भगवान लिखा उसने ये इंसान लिखा लिखा चन्द्रगुप्त हथियार जिसने उसने ही पोरस महान लिखा अब उस खुदा की खुदाई नही मिलती आज कल वो स्याही किसी दुकान में नही मिलती जिसने गौतम बुद्ध लिखा हल्दीघाटी का युद्ध लिखा लिखी जिसने वीरो की गाथा उसने महाराणा रुद्र लिखा जिसने टीपू सुल्तान लिखा झांसी का सम्मान लिखा लिखा जिसने भगत का कलाम उसने सुभाष का मान लिखा अब इन वीरो की परछाई नही मिलती आज कल वो स्याही किसी दुकान में नही मिलती जिसने दिनकर का राष्ट्रवाद लिखा निराला का संवाद लिखा लिखा जिसने कुमार के विश्वास को उसने मुंशी...

Support for ASIFA poem by Author Pawan

कविता – आज मैने सभ्य समाज में असभ्यता देखी है। फिर एक बेटी को रौंदा कुछ बेहशी दरिंदो ने क्या गलती की थी? उन नन्हें परिंदों ने धर्म की आड़ में फिर कुछ मुजरिम छूट रहे है आज फिर एक बच्ची की माँ के आँशु फुट रहे है आज भगवान के घर में भी मैने वीभत्सता देखी है सभ्य समाज मे मैने आज असभ्यता देखी है  अभी कुछ मत बोलो क्योंकि राजा सो रहे है चुनाव के लिए फिर कुछ दंगे बो रहे है इस लोकतंत्र मै कौन उस माँ को न्याय दिलाएगा कौन उस बाप को अब अब्बू कह कर बुलायेगा यह दाग नही है सिर्फ मुसलमान पर  यह तो घाव है पूरे हिंदुस्तान पर आज मैने रोते बिलखते मानवता देखी है  सभ्य समाज मे मैने आज असभ्यता देखी है  लेकिन फिर कुछ लोग इसे सम्प्रदायिकता में तोलएंगे फिर कुछ लोग बिकाऊ मीडिया की भाषा बोलएंगे आज फिर मैने पनपनती अराजकता देखी है  सभ्य समाज मे मैने आज असभ्यता देखी है  छोड़ ये मर्यादा रूप और काली का अवतार कर ऐसे दानवो का तू देवी नरसंहार कर  दिखा दे कि स्त्री कमजोर नही है इस असभ्य समाज के लिए औरत भी हथियार उठा सकती है अपने स्वभिमान के लिए  आज...

कविता - सच कह रहा हु मै शायर नही हु बस लोग कहते है

कविता – सच कह रहा हु मै शायर नही हु बस लोग कहते है। जिसे चाहता हु अपने ख्यालो में वो ख्वाइस हो तुम जिसे तराशा था अपने सपनो में उन सपनों की नुमाइश हो तुम पता नही इश्क़ में  लोग क्या क्या सहते है सच कह रहा हु मै शायर नही हु बस लोग कहते है....2 इश्क़ के दरिये में गोते जाने कितने लगाते है नीलकंठ सा जहर जाने कितने पाते है। आज कल वो आशिक़ मोहब्बत में रहते है सच कह रहा हु मै शायर नही हु बस लोग कहते है...3 आज कल प्रेम में मीरा की भक्ति कँहा कृष्ण को प्रेमवश में करने वाली  वो राधा में शक्ति कँहा प्रेम के आगे तो भगवान भी ढहते है सच कह रहा हु मै शायर नही हु बस लोग कहते है। Copyright © By Wrote by Author Pawan Singh Sikarwar