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किताबे और जिंदगी written by Author Pawan Singh

मैने अपनी जिंदगी को किताबो में तब्दील कर दिया है। जो लोग मुझे जीते जी नही समझ पाए......
वो मेरे जाने के बाद इसके जरिए समझ ले।

उस किताब के पन्नो में मैने अपनी यादे भी दाल दी है जिससे जो लोग मेरे लफ्ज़ो को जीते जी नही समझ पाए.....
 वो मेरे जाने के बाद इसके जरिए समझ ले।

इश्क़ मेने भी किया लेकिन जिसे किया उसे बता न सका। वो इश्क भी मैने इसमें दाल दिया है जिससे जो मेरे इश्क़ को जीते जी नही समझ पाए....
 वो मेरे जाने के बाद इसके जरिये समझ ले

एक किताब लिखी है मैने , अपनी जिंदगी से जुड़ी कुछ यादे , लफ्ज ,  इश्क़ ओर मेरी तन्हाई भी इसमें दाल दी है।
जिससे जो मेरी जिंदगी को जीते जी नही समझ पाए... वो मेरे जाने के बाद इसके जरिये समझ ले

Written by Author Pawan Singh

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