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श्रमिक को तोहफा तो दो - ऑथर पवन सिकरवार

मुझे कुछ समय दो
उस व्याध से लड़ने का
श्रमिक को तोहफा तो दो
यूँ ही लड़कर मरने का
दीप प्रज्वलित कर
सच्चाई का उजियारा फैलाना है
मुझे हिम्मत करने दो
ऐसा कुछ कर गुजरने का
श्रमिक को तोहफा तो दो
यूँ ही लड़कर मरने का
सोचा था कभी एक किसान
ताज पहन दिखाएगा
सोचा था कभी एक मजदूर
सिंहासन पर बैठ पाएगा
उसे तोहफा तो दो
ऐसे सपने देखने का
मुझे कुछ समय दो
उस व्याध से लड़ने का

ऑथर पवन सिकरवार


Comments

  1. यकीनन सुंदर और चिंतनीय कविता। बेहतरीन श्रमिक को तोहफा तो दो।

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